Wednesday, 17 January 2018

Desh bhakti

भारत भूमि का एक नाम देव भूमि है जिसमे जन्म लेने के लिए देवता भी लालायित रहते थे #स्वर्ग और अपवर्ग (मोक्ष ) दोनों को प्राप्त करने वाली इस पुण्य धरा के ऋषि -महर्षि और ब्रह्मा अर्थात वेद ज्ञान और ईश्वर का साक्षात्कार करने वाले ब्राह्मण गुरुओ के चरणविंद में बैठ कर देश-विदेश के लोग आचार -विचार और ज्ञान विज्ञानं की क्षिक्षा ग्रहण करते थे # नालंदा और तक्षशिला जैसे यूनिवर्सिटी  में हज़ारो विद्यार्थी विविध विद्याओ को पढ़ के अपन अहोभाग्य समझते थे # उस समय भारत विश्व गुरु के पद पर आसीन  था # समस्त ज्ञान विज्ञानं के प्रचार का केंद्र भारत ही था # सृस्टि के आदि में मानव मात्रा को कर्त्तव्य पथ का बोध करने वाली पवित्र वेद वाणी का ज्ञान चार ऋषियों के हृदय में यही पर हुआ था #


मर्यादापुरुषोत्तम सही राम और योगेश्वर श्री कृष्णा  जी की क्रीड़ास्थली भी यही है # अपने बल से सत्रुओ का मानमर्दन करने वाले अर्जुन ,भीम न,हनुमान,बालक भारत,राजीनीति के चतुर खिलाडी  आचार्य चाणक्य ,चंद्र गुप्ता मौर्या ,मेवाड़ के गौरव महाराणा प्रताप ,छात्रपति शिवजी ,रानी दुर्गावती , महारानी नलक्समी बाई ,छात्रसाल बुंदेला ,चंद्रशेखर आज़ाद ,वीर भगत सिंह ,नेताजी सुभासचन्द्र बोष ,स्वतंत्र वीर सावरकर आदि नवरत्न इसी भारत भूमि की कूख  से उतपन्न हुए है जिनका नाम ले कर आज भी हम गर्वोन्नत होते है #


ऐसा  प्रतीत होता है की सृस्टि  रचियता ने अवकाश के चनो में खूब सोच विचार कर भारत भूमि का निर्माण किया है # पाकिस्तान,अफगानिस्तान ,ब्रह्मा देश ,बांग्ला देश आदि   

Desh bhakti geet hatho me tiranga payara teri go

हाथों में तिरंगा प्यारा , तेरी गोद  का मुझको सहारा
जय जय हो भारत भूमि , जय जय हो भारत माता
सरहद पर जब दुश्मन ने काठो के तीर चलाये
सर बांध कफ़न वीरो ने सीने पर चोट है खाये 

Desh bhakti

भारत भूमि का एक नाम देव भूमि है जिसमे जन्म लेने के लिए देवता भी लालायित रहते थे #स्वर्ग और अपवर्ग (मोक्ष ) दोनों को प्राप्त करने वाली इस पु...